गंभीर चिंता, दुख व परेशानी से मुक्ति की मसनून दुआएं
संदर्भ एवं धार्मिक महत्व
अत्यधिक तनाव, अवसाद, चिंता और कठिन संकट के समय अल्लाह की मदद मांगने का सबसे शक्तिशाली ज़रिया पैगंबर यूनुस (अलैहिस्सलाम) की दुआ और नबी ﷺ की चिंता व शोक से पनाह मांगने की सुन्नत दुआ है (सहीह बुख़ारी 6369)।
📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस
2 आयात / हदीसला इलाहा इल्ला अन्ता सुब्हानका इन्नी कुन्तु मिनज़-ज़ालिमीन।
तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ही ज़ालिमों में से था।
स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद
अल्लाहुम्मा इन्नी अ'ऊज़ु बिका मिनल-हम्मि वल-हज़नि, वल-'अज्ज़ि वल-कसलि, वल-जुब्नि वल-बुख़लि, व दल'इद-दैनी व ग़लबातिर-रिजाल।
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ चिंता और शोक से, लाचारी और सुस्ती से, बुज़दिली और कंजूसी से, क़र्ज़ के बोझ से और लोगों के दबाव व दमन से।
स्रोत: सहीह बुख़ारी 6369
🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा
तौहीद के पक्के यक़ीन के साथ यूनुस (अ.) की दुआ और नबी ﷺ की सिखाई हुई पनाह की दुआ: 'अल्लाहुम्मा इन्नी अ'ऊज़ु बिका मिनल-हम्मि वल-हज़न...' बार-बार पढ़ें। साथ ही डॉक्टर की सलाह और नमाज़ की पाबंदी जारी रखें।
महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश
रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।
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बुरी नज़र (बदनज़र) उतारने का मसनून ग़ुस्ल व वुज़ू का तरीक़ा
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'बुरी नज़र सच है। यदि कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती, तो वह बुरी नज़र ही होती। और जब तुमसे ग़ुस्ल करने को कहा जाए, तो ग़ुस्ल कर दो।' (सहीह मुस्लिम 2188)। यदि नज़र लगाने वाले का पता हो, तो उससे वुज़ू करवाकर उस पानी को पीड़ित पर डालना सहीह सुन्नत से साबित रुक़िया व शिफ़ा है।
बुरी नज़र (ऐन) और ईर्ष्या के लिए सहीह रुक़या
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: 'नज़र का लगना सच है' (मुस्लिम २१८८)। किसी सुंदर चीज़ को देखकर ईर्ष्या या आश्चर्य से नज़र लग सकती है। जिब्रील (अ.) ने स्वयं नबी ﷺ पर नज़र का रुक़या किया था।