३. विभिन्न कष्ट एवं सहीह रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

[HI] অসুস্থতা, বিষাক্ত দংশন ও জ্বরের মাসনূন রুকিয়া

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

অসুস্থ ব্যক্তির সেবা করার সময় বা বিষাক্ত কোনো পোকা দংশন করলে রাসুলুল্লাহ ﷺ আল্লাহর সুন্দর নামের মাধ্যমে আরোগ্য প্রার্থনা করতেন। তবে বিষাক্ত দংশন বা গুরুতর অসুস্থতায় জরুরি মেডিকেল হাসপাতালে চিকিৎসা গ্রহণ করা শরীয়তের সরাসরি নির্দেশ।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

1 आयात / हदीस
हदीसSahih al-Bukhari 5745• Sahih
اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ أَذْهِبِ الْبَاسَ، اشْفِهِ وَأَنْتَ الشَّافِي، لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

अल्लाहुम्मा रब्बन-नास, अज़हिबिल बा'स, इशफ़िही व अन्ताश-शाफ़ी, ला शिफ़ा-अ इल्ला शिफ़ाउक, शिफ़ा-अन ला युगादिरु सक़मा।

अनुवाद एवं अर्थ:

ऐ अल्लाह, इन्सानों के रब! तकलीफ़ दूर फ़रमा और शिफ़ा दे, तू ही शिफ़ा देने वाला है। तेरी शिफ़ा के सिवा कोई शिफ़ा नहीं, ऐसी शिफ़ा दे जो किसी बीमारी को न छोड़े।

स्रोत: सहीह बुख़ारी अनुवाद

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

রোগীর কপালে বা যন্ত্রণার স্থানে ডান হাত রেখে অত্যন্ত বিনয়ের সাথে পাঠ করুন: 'আল্লাহুম্মা রাব্বান-নাস, আযহিবিল বা'স, ইশফিহি ওয়া আনতাশ-শাফী, লা শিফা'আ ইল্লা শিফাউকা, শিফা'আন লা ইয়ুগাদিরু সাক্বামা'। একই সাথে দ্রুত ডাক্তারের চিকিৎসা ও প্রয়োজনীয় ইনজেকশন বা ওষুধ গ্রহণ করুন।

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महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

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कष्ट निवारण एवं रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

बुरी नज़र (बदनज़र) उतारने का मसनून ग़ुस्ल व वुज़ू का तरीक़ा

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'बुरी नज़र सच है। यदि कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती, तो वह बुरी नज़र ही होती। और जब तुमसे ग़ुस्ल करने को कहा जाए, तो ग़ुस्ल कर दो।' (सहीह मुस्लिम 2188)। यदि नज़र लगाने वाले का पता हो, तो उससे वुज़ू करवाकर उस पानी को पीड़ित पर डालना सहीह सुन्नत से साबित रुक़िया व शिफ़ा है।

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कष्ट निवारण एवं रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

बुरी नज़र (ऐन) और ईर्ष्या के लिए सहीह रुक़या

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: 'नज़र का लगना सच है' (मुस्लिम २१८८)। किसी सुंदर चीज़ को देखकर ईर्ष्या या आश्चर्य से नज़र लग सकती है। जिब्रील (अ.) ने स्वयं नबी ﷺ पर नज़र का रुक़या किया था।

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