हर मर्ज़ की शिफ़ा के लिए सूरह अल-फ़ातिहा का रुक़या
संदर्भ एवं धार्मिक महत्व
सूरह अल-फ़ातिहा क़ुरआन की सबसे महान रुक़या है। सहाबी अबू सईद अल-ख़ुदरी (रज़ि.) ने बिच्छू के डंक मारे हुए एक व्यक्ति पर फ़ातिहा पढ़कर दम किया था और वह तुरंत ठीक हो गया था (बुख़ारी ५७३६)।
📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस
1 आयात / हदीसबिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन। अर्रहमानिर्रहीम। मालिकि यौमिद्दीन। इय्याका नाबुदु व इय्याका नस्तईन। इहदिनस सिरातल मुस्तकीम। सिरातल्लज़ीना अनअम्ता अलैहिम, गैरिल मगदू़बि अलैहिम वलद-दॉल्लीन।
अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है। सब तारीफें अल्लाह ही के लिए हैं जो तमाम जहानों का रब है। बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला। बदले के दिन का मालिक। हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद मांगते हैं। हमें सीधे रास्ते पर चला। उन लोगों के रास्ते पर जिन पर तूने इनाम फरमाया, न कि उनका जिन पर गज़ब हुआ और न भटके हुओं का।
स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद
🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा
मरीज़ के पास बैठकर पूरे यक़ीन के साथ ७ बार सूरह अल-फ़ातिहा की तिलावत करें। तिलावत के बाद दर्द वाली जगह पर हल्की फूंक मारें और हाथ फेरें।
महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश
रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।
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बुरी नज़र (बदनज़र) उतारने का मसनून ग़ुस्ल व वुज़ू का तरीक़ा
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'बुरी नज़र सच है। यदि कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती, तो वह बुरी नज़र ही होती। और जब तुमसे ग़ुस्ल करने को कहा जाए, तो ग़ुस्ल कर दो।' (सहीह मुस्लिम 2188)। यदि नज़र लगाने वाले का पता हो, तो उससे वुज़ू करवाकर उस पानी को पीड़ित पर डालना सहीह सुन्नत से साबित रुक़िया व शिफ़ा है।
बुरी नज़र (ऐन) और ईर्ष्या के लिए सहीह रुक़या
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: 'नज़र का लगना सच है' (मुस्लिम २१८८)। किसी सुंदर चीज़ को देखकर ईर्ष्या या आश्चर्य से नज़र लग सकती है। जिब्रील (अ.) ने स्वयं नबी ﷺ पर नज़र का रुक़या किया था।