३. विभिन्न कष्ट एवं सहीह रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

नींद में डर लगना, घबराहट और अनिद्रा (बेचैनी) की मसनून दुआ

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

सोते समय डर लगने, अचानक घबरा जाने या बेचैनी व अनिद्रा की स्थिति में अल्लाह के रसूल ﷺ ने सहाबा को अल्लाह के परिपूर्ण कलिमात के ज़रिए पनाह मांगने की ख़ास दुआ सिखाई (सुनन अबू दाऊद 3893)। यह दिल को सुकून पहुँचाने और शैतानी वसवसों को दूर करने का सुन्नत उपाय है।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

3 आयात / हदीस
हदीसSunan Abi Dawud 3893• Hasan
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ غَضَبِهِ وَعِقَابِهِ وَشَرِّ عِبَادِهِ وَمِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَنْ يَحْضُرُونِ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

अ'ऊज़ु बिकालीमातिल-लाहित-ताम्माति मिन ग़ज़बिही व 'इक़ाबिही व शर्रि 'इबादिही व मिन हमज़ातिश-शयातीनि व अय-यहदुरुन।

अनुवाद एवं अर्थ:

अल्लाह के रसूल ﷺ नींद में डर या बेचैनी के समय यह पढ़ने की तालीम देते थे: 'मैं पनाह मांगता हूँ अल्लाह के परिपूर्ण कलिमात के ज़रिए—उसके ग़ज़ब, उसकी सज़ा, उसके बंदों की बुराई, और शैतानों के वसवसों व उनकी मौजूदगी से।'

स्रोत: सुनन अबू दाऊद

क़ुरआनक़ुरआन 2:255
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम। ला ताखुज़ुहू सिनतुंव वला नौम। लहू मा फिस-समावाति वमा फिल-अर्ज़। मन ज़ल्लज़ी यशफ़उ इन्दहू इल्ला बि-इज़निह। यालमु मा बैना अयदीहिम वमा खल्फ़हुम, वला युहीतूना बि-शयइम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा-अ। वसिआ कुरसिय्युहुस समावाति वल-अर्ज़, वला यऊदुहू हिफ़्जु़हुमा, व हुवल अलिय्युल अज़ीम।

अनुवाद एवं अर्थ:

अल्लाह, जिसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और सब का थामने वाला है। उसे न तो ऊंघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी अनुमति के बिना उसके यहाँ सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है। वे उसके ज्ञान में से किसी चीज़ को घेर नहीं सकते मगर जितना वह चाहे। उसकी कुरसी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। वह सबसे बुलन्द और बहुत बड़ा है।

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

हदीसSahih al-Bukhari 5017• Sahih
كَانَ إِذَا أَوَى إِلَى فِرَاشِهِ كُلَّ لَيْلَةٍ جَمَعَ كَفَّيْهِ ثُمَّ نَفَثَ فِيهِمَا فَقَرَأَ فِيهِمَا: قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ، وَقُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ، وَقُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ، ثُمَّ يَمْسَحُ بِهِمَا مَا اسْتَطَاعَ مِنْ جَسَدِهِ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

काना इज़ा अवा इला फ़िराशिही कुल्ला लैलातिन जमा'अ कफ़्फ़ैहि सुम्मा नफ़सा फ़ीहिमा फ़क़रअ फ़ीहिमा: क़ुल हुवल्लाहु अहद, व क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़, व क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन-नास, सुम्मा यमसहू बिहिमा मसतता'अ मिन जसदिह।

अनुवाद एवं अर्थ:

रसूलुल्लाह ﷺ जब हर रात अपने बिस्तर पर जाते, तो अपनी दोनों हथेलियाँ मिलाते, फिर उनमें हल्की फूँक मारते और सूरह अल-इखलास, सूरह अल-फ़लक़ और सूरह अन-नास पढ़ते। फिर दोनों हाथों से जहाँ तक हो सके अपने जिस्म पर फेरते।

स्रोत: सहीह बुख़ारी अनुवाद

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

सोने से पहले वुज़ू करें और बिस्तरा झाड़ें। आयतुल कुर्सी और तीनों क़ुल (इख़्लास, फ़लक़, नास) पढ़कर हाथों पर दम करके बदन पर फेरें। नींद में डर या बेचैनी होने पर 'अ'ऊज़ु बिकालीमातिल-लाहित-ताम्माति...' वाली दुआ पढ़ें।

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महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

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बुरी नज़र (बदनज़र) उतारने का मसनून ग़ुस्ल व वुज़ू का तरीक़ा

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'बुरी नज़र सच है। यदि कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती, तो वह बुरी नज़र ही होती। और जब तुमसे ग़ुस्ल करने को कहा जाए, तो ग़ुस्ल कर दो।' (सहीह मुस्लिम 2188)। यदि नज़र लगाने वाले का पता हो, तो उससे वुज़ू करवाकर उस पानी को पीड़ित पर डालना सहीह सुन्नत से साबित रुक़िया व शिफ़ा है।

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