[HI] কুরআনের সাধারণ শিফা ও রহমতের আয়াত
संदर्भ एवं धार्मिक महत्व
মহান আল্লাহ পুরো কুরআনুল কারীমকে মুমিনদের জন্য দৈহিক ও আত্মিক আরোগ্য এবং রহমতের মাধ্যম বানিয়েছেন। তবে মনে রাখতে হবে এটি একটি সাধারণ কুরআনী শিফা, নির্দিষ্ট কোনো যাদুর 'বিশেষ ব্রেকিং টুল' হিসেবে মনগড়া কোনো সংখ্যা আরোপ করা শরীয়তসম্মত নয়।
📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस
1 आयात / हदीसव नुनज्ज़िलु मिनल-क़ुरआनि मा हुव शिफ़ाऊं व रहमतुल लिल-मोमिनीन व ला यज़ीदुज़-ज़ालिमीना इल्ला ख़सारा।
और हम क़ुरआन में से वह नाज़िल करते हैं जो ईमान वालों के लिए शिफ़ा और रहमत है, और यह ज़ालिमों के लिए सिर्फ़ नुक़सान ही बढ़ाता है।
स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद
🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा
রোগাক্রান্ত অবস্থায় কুরআন মাজীদের আয়াতসমূহ মনোযোগ সহকারে তিলাওয়াত করুন বা শ্রবণ করুন। আল্লাহর কালামের ওপর পূর্ণ তাওয়াক্কুল রেখে আরোগ্য কামনা করুন এবং একইসাথে যথারীতি প্রয়োজনীয় চিকিৎসকের ঔষধ ও পথ্য গ্রহণ করুন।
महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश
रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।
संबंधित अन्य विषय
बुरी नज़र (बदनज़र) उतारने का मसनून ग़ुस्ल व वुज़ू का तरीक़ा
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'बुरी नज़र सच है। यदि कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती, तो वह बुरी नज़र ही होती। और जब तुमसे ग़ुस्ल करने को कहा जाए, तो ग़ुस्ल कर दो।' (सहीह मुस्लिम 2188)। यदि नज़र लगाने वाले का पता हो, तो उससे वुज़ू करवाकर उस पानी को पीड़ित पर डालना सहीह सुन्नत से साबित रुक़िया व शिफ़ा है।
बुरी नज़र (ऐन) और ईर्ष्या के लिए सहीह रुक़या
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: 'नज़र का लगना सच है' (मुस्लिम २१८८)। किसी सुंदर चीज़ को देखकर ईर्ष्या या आश्चर्य से नज़र लग सकती है। जिब्रील (अ.) ने स्वयं नबी ﷺ पर नज़र का रुक़या किया था।