दाम्पत्य कलह और विवाद दूर करने की मसनून दुआ व नसीहत
संदर्भ एवं धार्मिक महत्व
महत्वपूर्ण सूचना: यह क़ुरआन व सुन्नत की एक आम दुआ और नसीहत है, कोई विशिष्ट रुक़िया नहीं। इस्लाम में दाम्पत्य झगड़ा मिटाने का कोई 'जादुई रुक़िया' नहीं होता। पति-पत्नी में फूट डालकर अलगाव करवाना शैतान का सबसे पसंदीदा गुनाह है (सहीह मुस्लिम 2813)। इस समस्या का समाधान आपसी सब्र, अच्छे बर्ताव और अल्लाह से दुआ में है।
📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस
3 आयात / हदीसइन्ना इब्लीसा यद'उ 'अर्शहू 'अलल मा-इ सुम्मा यब'असु सरायाहु फ़-अदनाहुम मिन्हु मंज़िलतन अ'ज़मुहुम फ़ितना...
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'इब्लीस पानी पर अपना तख्त बिछाता है और अपने लश्कर को लोगों में फ़ितना फैलाने भेजता है। उनमें उसके सबसे क़रीब वह होता है जो सबसे बड़ा फ़ितना फैलाता है। उनमें से एक आकर कहता है: मैंने यह और वह किया; इब्लीस कहता है: तूने कुछ नहीं किया। फिर दूसरा आकर कहता है: मैंने फ़लाँ का पीछा तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसके और उसकी बीवी के दरमियान जुदाई (तलाक) न करवा दी। तब इब्लीस उसे अपने सीने से लगाता है और कहता है: शाबाश, तूने बहुत बड़ा काम किया।'
स्रोत: सहीহ मुस्लिम
रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्र-त अ'युनिव वज'अल्ना लिल-मुत्तक़ीना इमामा।
ऐ हमारे रब! हमें हमारी पत्नियों और हमारी औलाद से आँखों की ठंडक अता फ़रमा और हमें परहेज़गारों का इमाम बना।
स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद
ला तज'अलु बुयूताकुम मक़ाबिर, इन्नश-शैताना यनफ़िरु मिनल-बैतिल्लज़ी तुक़रउ फ़ीहि सूरतुल-बक़रह।
अपने घरों को क़ब्रिस्तान न बनाओ। बेशक शैतान उस घर से भाग जाता है जिसमें सूरह अल-बक़रह पढ़ी जाती है।
स्रोत: सहीह मुस्लिम अनुवाद
🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा
पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति सब्र और वफ़ादारी बरतें। घर में सूरह अल-बक़रा की तिलावत करें ताकि शैतानी वसवसे दूर हों। हर नमाज़ के बाद और सज्दे में क़ुरआन की यह दुआ पढ़ें: 'रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रता अ'युन' (फ़ुरक़ान: 74)।
महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश
रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।
संबंधित अन्य विषय
क़र्ज़ मुक्ति व हलाल रोज़ी की मसनून दुआएं
महत्वपूर्ण सूचना: यह जीवन की आवश्यकता के लिए सहीह सुन्नत से साबित आम दुआ है, कोई रुक़िया नहीं। इस्लाम में क़र्ज़ या रोज़ी के लिए कोई 'जादू काटने वाला रुक़िया' नहीं है। नबी ﷺ ने क़र्ज़ के बोझ से पनाह माँगी (सहीह बुख़ारी 6369) और अली (रज़ि.) को पहाड़ बराबर क़र्ज़ अदा होने की दुआ सिखाई (तिर्मिज़ी 3563)।
[HI] নেক সন্তান কামনার কুরআনী দুআ (দোয়ায়ে যাকারিয়া)
সতর্কতা: এটি রুকিয়া নয়, বরং জীবনের একটি পবিত্র প্রয়োজনে আল্লাহর দরবারে নবীগণের শেখানো একনিষ্ঠ দুআ। সন্তান না হওয়া বা বিলম্বের ক্ষেত্রে মনগড়া কোনো তান্ত্রিক ঝাড়ফুঁক না করে চিকিৎসকের চিকিৎসা নিন এবং এই কুরআনী দুআ পাঠ করুন।