३. विभिन्न कष्ट एवं सहीह रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर रुक़या करना

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

सहाबी उस्मान बिन अबिल आस (रज़ि.) ने शरीर में भयंकर दर्द की शिकायत की तो नबी ﷺ ने उन्हें दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर विशेष दुआ पढ़ने का हुक्म दिया, जिससे वे पूर्णतः स्वस्थ हो गए (मुस्लिम २२०२)।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

1 आयात / हदीस
हदीसSahih Muslim 2202• Sahih
بِاسْمِ اللهِ (ثَلَاثًا)، أَعُوذُ بِاللهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ (سَبْعَ مَرَّاتٍ)
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

(३ बार:) बिस्मिल्लाह। (७ बार:) अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िर।

अनुवाद एवं अर्थ:

(दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर ३ बार कहें:) 'बिस्मिल्लाह', और (७ बार कहें:) 'मैं अल्लाह और उसकी क़ुदरत की पनाह मांगता हूँ उस दर्द के नुक़सान से जो मैं महसूस कर रहा हूँ और जिससे डरता हूँ।'

स्रोत: सहीह मुस्लिम

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

जिस जगह दर्द हो रहा हो वहाँ दाहिना हाथ रखें। ३ बार 'बिस्मिल्लाह' कहें। फिर ७ बार पढ़ें: 'अऊज़ु बिल्लाहि व क़ुदरतिही मिन शर्रि मा अजिदु व उहाज़िर'। साथ में डॉक्टरी इलाज जारी रखें।

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महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

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