१. बुनियादी नियम एवं चेतावनियाँप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

बीमारी में डॉक्टर से इलाज कराना अनिवार्य है

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

इस्लाम में बीमार होने पर डॉक्टरी इलाज कराना और दवाई लेना सुन्नत और ज़रूरी है। पैगंबर ﷺ ने फरमाया: 'अल्लाह ने कोई ऐसी बीमारी नहीं उतारी जिसकी शिफ़ा (इलाज) न उतारी हो' (बुख़ारी ५६७८)। हर बीमारी को जादू या जिन्न समझना अज्ञानता है।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

1 आयात / हदीस
हदीसSahih al-Bukhari 5678• Sahih
مَا أَنْزَلَ اللَّهُ دَاءً إِلَّا أَنْزَلَ لَهُ شِفَاءً
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

मा अनज़लल्लाहु दा-अन इल्ला अनज़ला लहू शिफ़ा-आ।

अनुवाद एवं अर्थ:

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'अल्लाह ने ऐसी कोई बीमारी नहीं उतारी जिसकी शिफ़ा (इलाज) न उतारी हो।' (अतः डॉक्टरी इलाज अनिवार्य है)।

स्रोत: सहीह बुख़ारी

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

किसी भी शारीरिक या मानसिक तकलीफ़ में तुरंत योग्य डॉक्टर से परामर्श लें और दवाई समय पर खाएं। साथ ही साथ क़ुरआन की रुक़या पढ़ें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई हरगिज़ बंद न करें।

⚖️

महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

संबंधित अन्य विषय

बुनियादी बातेंप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

रुक़या क्या है और इसकी शरीअत शर्तें

रुक़या का अर्थ है अल्लाह की पनाह और शिफ़ा के लिए क़ुरआन की आयात और सुन्नत की दुआएं पढ़कर हल्का सा दम (फूंक) करना। शरीअत की शर्तें: १) यह अल्लाह के कलाम या उसके नामों व गुणों से हो, २) स्पष्ट और समझने योग्य भाषा में हो, और ३) यह पक्का यक़ीन हो कि शिफ़ा सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म से है।

1 आयात / हदीसविवरण देखें →
बुनियादी बातेंप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

तावीज़-गंडा रुक़या नहीं — यह हराम और शिर्क है

गले या बाज़ू में किसी भी प्रकार का तावीज़, धागा या कौड़ी लटकाना इस्लाम में सख़्त मना है। नबी ﷺ ने फरमाया: 'जिसने तावीज़ लटकाया, उसने यक़ीनन शिर्क किया' (मुसनद अहमद १७४२२)। रुक़या ज़ुबान से तिलावत और दुआ का नाम है, न कि कोई चीज़ लटकाने का।

1 आयात / हदीसविवरण देखें →