३. विभिन्न कष्ट एवं सहीह रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

[HI] যাদু (সিহর) বিনষ্টের কুরআনী রুকিয়া ও প্রতিরোধ

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

যাদু একটি মারাত্মক কুফরি কাজ যা শয়তানের সহযোগিতায় অনিষ্টকারী ব্যক্তিরা করে থাকে। ইসলামে যাদু কাটার জন্য কোনো তান্ত্রিক, কুফরি কবিরাজ বা তথাকথিত নুশরা (যাদু দিয়ে যাদু কাটা) কঠোরভাবে হারাম। কুরআন মাজীদের আয়াত ও ৩ কুল তিলাওয়াতের মাধ্যমে আল্লাহর রহমতে যাদুর প্রভাব সম্পূর্ণরূপে ধ্বংস হয়ে যায়।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

3 आयात / हदीस
क़ुरआनक़ुरआन 7:117–119
وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَلْقِ عَصَاكَ ۖ فَإِذَا هِيَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ ۝ فَوَقَعَ الْحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝ فَغُلِبُوا هُنَالِكَ وَانقَلَبُوا صَاغِرِينَ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

व अवहैना इला मूसा अन अल्क़ि असाक फ़-इज़ा हिय तल्क़फ़ु मा या'फ़िकून। फ़वक़'अल-हक़्क़ु व बतल मा कानू या'मलून। फ़ग़ुलिबूं हुनालिक वनक़लबू साग़िरीन।

अनुवाद एवं अर्थ:

और हमने मूसा की तरफ़ वह्य भेजी कि अपनी लाठी डाल दो, तो अचानक वह निगलने लगी जो कुछ वे झूठ गढ़ रहे थे। फिर हक़ साबित हो गया और जो कुछ वे कर रहे थे सब बातिल हो गया। बस वे वहाँ शिकस्त खा गए और ज़लील होकर लौटे।

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

क़ुरआनक़ुरआन 113:1–5
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ۝ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ۝ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ۝ وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ۝ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

कुल अऊज़ु बिरब्बिल फलक़। मिन शर्रि मा ख़लक़। व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब। व मिन शर्रिन-नफ़्फ़ासाति फ़िल उक़द। व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।

अनुवाद एवं अर्थ:

कहो, 'मैं पनाह मांगता हूँ सुबह के रब की, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की, और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए, और गांठों में फूंकने वाली जादूगरनियों की बुराई से, और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।'

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

क़ुरआनक़ुरआन 114:1–6
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ۝ مَلِكِ النَّاسِ ۝ إِلَٰهِ النَّاسِ ۝ مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ۝ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ۝ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

कुल अऊज़ु बिरब्बिन-नास। मलिकिन-नास। इलाहिन-नास। मिन शर्रिल वसवासिल खन्नास। अल्लज़ी युवसविसु फ़ी सुदूरिन-नास। मिनल जिन्नति वन-नास।

अनुवाद एवं अर्थ:

कहो, 'मैं पनाह मांगता हूँ इंसानों के रब की, इंसानों के बादशाह की, इंसानों के सच्चे माबूद की—उस छुपकर फुसफुसाने वाले की बुराई से जो इंसानों के सीनों में वसवसा डालता है, चाहे वह जिन्नों में से हो या इंसानों में से।'

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

১) ওজু অবস্থায় পানি বা তেলের পাত্র সামনে রেখে সূরা আল-ফাতেহা, আয়াতুল কুরসী, সূরা আল-আ'রাফের ১১৭-১১৯ আয়াত এবং ৩ কুল পাঠ করে পানিতে ফুঁ দিন। ২) সেই পানি পান করুন ও গোসল করুন। ৩) সকাল-সন্ধ্যায় সুরক্ষার মাসনূন দুআসমূহ একনিষ্ঠভাবে পাঠ করুন।

⚖️

महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

संबंधित अन्य विषय

कष्ट निवारण एवं रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

बुरी नज़र (बदनज़र) उतारने का मसनून ग़ुस्ल व वुज़ू का तरीक़ा

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'बुरी नज़र सच है। यदि कोई चीज़ तक़दीर से आगे बढ़ सकती, तो वह बुरी नज़र ही होती। और जब तुमसे ग़ुस्ल करने को कहा जाए, तो ग़ुस्ल कर दो।' (सहीह मुस्लिम 2188)। यदि नज़र लगाने वाले का पता हो, तो उससे वुज़ू करवाकर उस पानी को पीड़ित पर डालना सहीह सुन्नत से साबित रुक़िया व शिफ़ा है।

3 आयात / हदीसविवरण देखें →
कष्ट निवारण एवं रुक़याप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

बुरी नज़र (ऐन) और ईर्ष्या के लिए सहीह रुक़या

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: 'नज़र का लगना सच है' (मुस्लिम २१८८)। किसी सुंदर चीज़ को देखकर ईर्ष्या या आश्चर्य से नज़र लग सकती है। जिब्रील (अ.) ने स्वयं नबी ﷺ पर नज़र का रुक़या किया था।

5 आयात / हदीसविवरण देखें →