अज़ान का जवाब और अज़ान के बाद की मसनून दुआ
संदर्भ एवं धार्मिक महत्व
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया: 'जब नमाज़ के लिए अज़ान दी जाती है, तो शैतान हवा छोड़ते हुए इतनी दूर भाग जाता है कि अज़ान की आवाज़ न सुन सके' (सहीह बुख़ारी 608, मुस्लिम 389)। अज़ान का जवाब देना और अज़ान के बाद वसीला की दुआ पढ़ना शैतान को भगाने और शफ़ाअत हासिल करने की अज़ीम सुन्नत है (सहीह बुख़ारी 614)।
📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस
1 आयात / हदीसअल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद-दा'वतित-ताम्मह, वस-सलातिल क़ाइमह, आति मुहम्मदनील-वसीलता वल-फ़ज़ीलह, वब'असहू मक़ामम-महमूदनि-ल्लज़ी व'अदतह।
ऐ अल्लाह! इस सम्पूर्ण पुकार और स्थापित होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद ﷺ को वसीला (सर्वोच्च दर्जा) और फ़ज़ीलत प्रदान फ़रमा, और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।
स्रोत: सहीह बुख़ारी 614
🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा
मुअज़्ज़िन की आवाज़ ध्यान से सुनें और जो वह कहे वही दोहराएं, सिवाय 'हय्या अलस-सलाह' और 'हय्या अलल-फ़लाह' के, जहाँ 'ला हौल वला क़ुव्वत इल्ला बिल्लाह' कहें। अज़ान ख़त्म होने पर नबी ﷺ पर दुरूद भेजें और दुआ पढ़ें: 'अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद-दा'वतित-ताम्मह...'।
महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश
रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।
संबंधित अन्य विषय
दैनिक हिफ़ाज़त के लिए सुबह-शाम के अज़कार
सुबह और शाम के समय नबी ﷺ द्वारा सिखाई गई मसनून दुआएं पढ़ना मोमिन के लिए सबसे मज़बूत ढाल है। यह बुरी नज़र, जादू, शैतानी वसवसों और ज़हरीले जानवरों से अल्लाह की हिफ़ाज़त में रखता है।
सोने से पहले की सुरक्षा और आयतुल कुर्सी
सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ने पर अल्लाह की तरफ़ से एक फ़रिश्ता हिफ़ाज़त के लिए नियुक्त हो जाता है और सुबह तक कोई शैतान पास नहीं आ सकता (बुख़ारी ५०१७)। साथ ही तीन क़ुल पढ़कर दम करना बुरे सपनों से बचाता है।