२. दैनिक हिफ़ाज़त एवं मसनून दुआएंप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

दैनिक हिफ़ाज़त के लिए सुबह-शाम के अज़कार

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

सुबह और शाम के समय नबी ﷺ द्वारा सिखाई गई मसनून दुआएं पढ़ना मोमिन के लिए सबसे मज़बूत ढाल है। यह बुरी नज़र, जादू, शैतानी वसवसों और ज़हरीले जानवरों से अल्लाह की हिफ़ाज़त में रखता है।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

5 आयात / हदीस
क़ुरआनक़ुरआन 112:1–4
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ ۝ اللَّهُ الصَّمَدُ ۝ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ۝ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

कुल हुवल्लाहु अहद। अल्लाहुस-समद। लम यलिद वलम यूलद। वलम यकुल-लहू कुफ़ुवन अहद।

अनुवाद एवं अर्थ:

कहो, 'वह अल्लाह एक है। अल्लाह निरपेक्ष और सबका सहारा है। न उसने किसी को जना और न वह जना गया। और न कोई उसके बराबर का है।'

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

क़ुरआनक़ुरआन 113:1–5
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ۝ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ۝ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ۝ وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ۝ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

कुल अऊज़ु बिरब्बिल फलक़। मिन शर्रि मा ख़लक़। व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब। व मिन शर्रिन-नफ़्फ़ासाति फ़िल उक़द। व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।

अनुवाद एवं अर्थ:

कहो, 'मैं पनाह मांगता हूँ सुबह के रब की, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की, और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए, और गांठों में फूंकने वाली जादूगरनियों की बुराई से, और ईर्ष्या करने वाले की बुराई से जब वह ईर्ष्या करे।'

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

क़ुरआनक़ुरआन 114:1–6
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ۝ مَلِكِ النَّاسِ ۝ إِلَٰهِ النَّاسِ ۝ مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ۝ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ۝ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

कुल अऊज़ु बिरब्बिन-नास। मलिकिन-नास। इलाहिन-नास। मिन शर्रिल वसवासिल खन्नास। अल्लज़ी युवसविसु फ़ी सुदूरिन-नास। मिनल जिन्नति वन-नास।

अनुवाद एवं अर्थ:

कहो, 'मैं पनाह मांगता हूँ इंसानों के रब की, इंसानों के बादशाह की, इंसानों के सच्चे माबूद की—उस छुपकर फुसफुसाने वाले की बुराई से जो इंसानों के सीनों में वसवसा डालता है, चाहे वह जिन्नों में से हो या इंसानों में से।'

स्रोत: मौलाना फ़तेह मुहम्मद

हदीसSunan Abi Dawud 5088• Sahih
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यदुर्रु मअस्मिही शयउन फिल अर्ज़ि वला फिस-समा-इ, व हुवस-समीउल अलीम।

अनुवाद एवं अर्थ:

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: 'जो कोई सुबह और शाम ३ बार कहे: उस अल्लाह के नाम से जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला, जानने वाला है—उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।'

स्रोत: सुनन अबू दाऊद

हदीसSahih Muslim 2709• Sahih
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन शर्रि मा ख़लक़।

अनुवाद एवं अर्थ:

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: 'जो कोई किसी जगह पर रुके और कहे: मैं अल्लाह के संपूर्ण शब्दों की पनाह मांगता हूँ उसकी पैदा की हुई हर चीज़ की बुराई से—तो उस जगह से जाने तक कोई चीज़ उसे नुक़सान नहीं पहुँचा सकती।'

स्रोत: सहीह मुस्लिम

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

फ़ज्र के बाद और अस्र/मग़रिब के बाद ३ बार सूरह इख़लास, फलक़ और नास पढ़ें। साथ ही ३ बार 'बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यदुर्रु...' और 'अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित ताम्माति...' पढ़ें।

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महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

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