[HI] দাজ্জাল ও যুগের ভয়াবহ ফিতনা থেকে নিরাপত্তা (সূরা আল-কাহাফ)
संदर्भ एवं धार्मिक महत्व
মানবজাতির ইতিহাসের সর্বাপেক্ষা ভয়ানক পরীক্ষা হলো দাজ্জালের ফিতনা। রাসুলুল্লাহ ﷺ উম্মতকে এই ফিতনা থেকে রক্ষা পাওয়ার জন্য সূরা আল-কাহাফের প্রথম দশটি আয়াত মুখস্থ করার ও আমল করার নির্দেশ দিয়েছেন।
📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस
1 आयात / हदीसमन हफ़िज़ अशर आयातिम मिन अव्वलि सूरतुल-कहफ़ि उसिम मिनद-दज्जाल।
जो सूरह अल-कहफ़ की शुरू की दस आयतें याद करेगा, वह दज्जाल के फ़ितने से महफ़ूज़ रहेगा।
स्रोत: सहीह मुस्लिम अनुवाद
🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा
সূরা আল-কাহাফের প্রথম ১০টি আয়াত মনোযোগের সাথে মুখস্থ করুন এবং অর্থ উপলব্ধি করুন। প্রতি জুমার দিনে সম্পূর্ণ সূরা কাহাফ পাঠ করার সুন্নাহ আমল অব্যাহত রাখুন। নামাজের শেষ বৈঠকে তাশাহহুদ ও দরূদের পর দাজ্জালের ফিতনা থেকে আশ্রয় চাওয়ার মাসনূন দুআ পড়ুন।
महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश
रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।
संबंधित अन्य विषय
दैनिक हिफ़ाज़त के लिए सुबह-शाम के अज़कार
सुबह और शाम के समय नबी ﷺ द्वारा सिखाई गई मसनून दुआएं पढ़ना मोमिन के लिए सबसे मज़बूत ढाल है। यह बुरी नज़र, जादू, शैतानी वसवसों और ज़हरीले जानवरों से अल्लाह की हिफ़ाज़त में रखता है।
सोने से पहले की सुरक्षा और आयतुल कुर्सी
सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ने पर अल्लाह की तरफ़ से एक फ़रिश्ता हिफ़ाज़त के लिए नियुक्त हो जाता है और सुबह तक कोई शैतान पास नहीं आ सकता (बुख़ारी ५०१७)। साथ ही तीन क़ुल पढ़कर दम करना बुरे सपनों से बचाता है।