२. दैनिक हिफ़ाज़त एवं मसनून दुआएंप्रत्यक्ष प्रमाण (Tier A)

बिजली की गरज सुनते समय की मसनून दुआ

संदर्भ एवं धार्मिक महत्व

बिजली और बादलों की गरज अल्लाह तआला की असीम कुदरत की निশानी है। सहाबी अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर (रज़ि.) जब बादलों की गरज सुनते तो बातचीत बंद कर देते और तस्बीह पढ़ते (मुअत्ता मालिक 1801, अल-अदबुल मुफ़रद 723, सहीह सनद)। यह प्राकृतिक आपदा के समय अल्लाह की पनाह लेने का मसनून अमल है।

📖पढ़ने योग्य आयात एवं हदीस

1 आयात / हदीस
दुआMuwatta Malik / Al-Adab Al-Mufrad• Sahih
سُبْحَانَ الَّذِي يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ
उच्चारण (हिंदी (Devanagari)):

सुब्हान-ल्लज़ी युसब्बिहुर-र'दु बि-हम्दिही वल-मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिह।

अनुवाद एवं अर्थ:

पवित्र है वह ज़ात, जिसकी प्रशंसा के साथ बिजली (गरज) उसकी पाकी बयान करती है और फ़रिश्ते भी उसके भय से उसकी महिमा गाते हैं।

स्रोत: अल-अदबुल मुफ़रद 723 (सहीह सनद)

🌿अमल करने का सुन्नत तरीक़ा

बादलों की गरज सुनते ही बातचीत रोक दें और दिल की आजिज़ी के साथ पढ़ें: 'सुब्हान-ल्लज़ी युसब्बिहुर-र'दु बि-हम्दिही वल-मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिह'। साथ ही सुरक्षित स्थान पर आश्रय लेने की सांसारिक सावधानी भी बरतें।

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महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं शरीअत निर्देश

रुक़या अल्लाह से हिफ़ाज़त और शिफ़ा मांगने का ज़रिया है; यह डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। तावीज़ न पहनें और न ही किसी ज्योतिषी या जादूगर के पास जाएं।

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सोने से पहले की सुरक्षा और आयतुल कुर्सी

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